एक ख़ूबसूरत लोक कहानी

बात बहुत पुराने ज़माने की है। एक आदमी था जिसके घर में बहुत सारे सोने के ज़ेवर थे जिनको वह बहुत सम्भालकर हमेशा तिजौरी में रखता था ।उसकी बीवी ने कई बार उससे कहा तिजौरी में इतने सारे गहने हैं "आप कभी मुझे पहनने के लिए क्यों नहीं देते?"वह आदमी अपनी बीवी की बात को हमेशा टाल दिया करता एक दिन जब उस की बीवी बार-बार गहने पहनने की ज़िद करने लगी तो वह आदमी चुपके से घर के पीछे वाले बाग़ में गया और एक गड्ढा खोद कर उस में ज़ेवरों को छुपा दिया ।इसके बाद वह रोज़ जाकर गड्ढे को खोल कर देखता कि ज़ेवर रखे हैं या नहीं ।फिर गड्ढे को वापस बंद कर देता ।एक दिन उसके एक नौकर ने उसको ऐसा करते हुए देख लिया और उसको शक हुआ कि हो न हो ज़रूर मेरे कंजूस मालिक ने यहाँ कोई ख़ज़ाना छुपाया है ।उसने गड्ढे को खोद कर वह जेवर निकाल लिए ।अगले दिन जब वह आदमी वहां आया तो देखा जेवर वहाँ से ग़ायब हो चुके हैं ।वह कंजूस आदमी ज़ोर -ज़ोर से रोने लगा और अपना सर पीटने लगा ।शोर सुनकर उसके मोहल्ले के लोग वहाँ आ गए और उससे रोने की वजह पूछी तो उस आदमी ने उनको सारी बात बताई ।उसकी बात को सुनकर एक आदमी बोला" तुम एक पत्थर को लेकर गड्ढे में उसी तरह छिपा दो जैसे तुमने सोना छिपाया था और सोचो कि गड्ढे में पत्थर नहीं बल्कि सोना है क्योंकि जिस तरह यह पत्थर तुम्हारे लिए बेकार है उसी तरह वह सोना भी तुम्हारे लिए बेकार था क्योंकि जिस चीज़ का हम कभी इस्तेमाल ही न करें वह हमारे किस काम की?"
कंजूस आदमी

बात बहुत पुराने ज़माने की है। एक आदमी था जिसके घर में बहुत सारे सोने के ज़ेवर थे जिनको वह बहुत सम्भालकर हमेशा तिजौरी में रखता था ।उसकी बीवी ने कई बार उससे कहा तिजौरी में इतने सारे गहने हैं "आप कभी मुझे पहनने के लिए क्यों नहीं देते?"वह आदमी अपनी बीवी की बात को हमेशा टाल दिया करता एक दिन जब उस की बीवी बार-बार गहने पहनने की ज़िद करने लगी तो वह आदमी चुपके से घर के पीछे वाले बाग़ में गया और एक गड्ढा खोद कर उस में ज़ेवरों को छुपा दिया ।इसके बाद वह रोज़ जाकर गड्ढे को खोल कर देखता कि ज़ेवर रखे हैं या नहीं ।फिर गड्ढे को वापस बंद कर देता ।एक दिन उसके एक नौकर ने उसको ऐसा करते हुए देख लिया और उसको शक हुआ कि हो न हो ज़रूर मेरे कंजूस मालिक ने यहाँ कोई ख़ज़ाना छुपाया है ।उसने गड्ढे को खोद कर वह जेवर निकाल लिए ।अगले दिन जब वह आदमी वहां आया तो देखा जेवर वहाँ से ग़ायब हो चुके हैं ।वह कंजूस आदमी ज़ोर -ज़ोर से रोने लगा और अपना सर पीटने लगा ।शोर सुनकर उसके मोहल्ले के लोग वहाँ आ गए और उससे रोने की वजह पूछी तो उस आदमी ने उनको सारी बात बताई ।उसकी बात को सुनकर एक आदमी बोला" तुम एक पत्थर को लेकर गड्ढे में उसी तरह छिपा दो जैसे तुमने सोना छिपाया था और सोचो कि गड्ढे में पत्थर नहीं बल्कि सोना है क्योंकि जिस तरह यह पत्थर तुम्हारे लिए बेकार है उसी तरह वह सोना भी तुम्हारे लिए बेकार था क्योंकि जिस चीज़ का हम कभी इस्तेमाल ही न करें वह हमारे किस काम की?" 



