अंदाज़े बयाँ
जी बहुत चाहता है सच बोलें
क्या करे हौसला नहीं होता।
-बशीर बद्र
तेरे ख़त का जवाब लिखा है
बेअदब को जनाब लिखा है
-एजाज़ अन्सारी
नए मकान बनाए तो फासलों की तरह
हमें ये शहर बसाना भी तो नहीं आया
-वसीम बरेलवी
शामे ग़म की सहर नहीं होती
या हमीं को खबर नहीं होती
-इब्ने इंशा
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