अंदाज़े-बयां इंशा जी उठो अब कूच करो ,
इस शहर में जी का लगाना क्या।
वहशी को सुकूँ से क्या मतलब,
जोगी का नगर में ठिकाना क्या ।
- इब्ने इंशा
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ,
खुदा बन्दे से खुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है ?
- इक़बाल
ये एक मेला है वादा किसी से क्या लेगा?
ढलेगा दिन तो हर इक अपना रास्ता लेगा।
-वसीम बरेलवी
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