Tuesday, 18 September 2012

                            ख़ुदा का इन्साफ़ 


वह एक ज़ालिम और सनकी बादशाह था ।उसे ग़रीब अवाम को परेशान करने में मज़ा आता था ।एक बार उसने एक बढ़ई को हुक्म दिया," जाओ और तेरह हज़ार तेरह सौ पौंड वज़न का लकड़ी का महीन बुरादा (powder)  तैयार करके कल सुबह तक ले कर आओ ।"पुराने ज़माने में आज -कल की तरह मशीनें नहीं होती थीं इस लिए एक रात में इतना बुरादा तैयार करना नामुमकिन था ।बढ़ई  परेशान हाल घर पहुंचा और अपनी बीवी को यह बात बताई ।बीवी ने कहा "परेशान मत हो ख़ुदा पर भरोसा रखो।"वह दोनों रो-रो कर ख़ुदा से रहम की दुआएं मांगने लगे।सुबह होने ही वाली थी कि दरवाज़े पर दस्तक हुई।बढ़ई ने जाकर देखा तो दरवाज़े पर बादशाह के सिपाही खड़े थे।एक सिपाही धीमी आवाज़ में बोला "सुनो बढ़ई बेहतरीन लकड़ी का एक उम्दा ताबूत तैयार करो बादशाह मर गया है।" Translated By-Raahi Naqvi 

                                                                               

















\

No comments:

Post a Comment