अंदाज़े बयाँ

कोई हाथ भी न मिलाएगा
जो गले मिलोगे तपाक से ,
ये नए मिज़ाज का शहर है
ज़रा फासले से मिला करो ।
- बशीर बद्र
मिली हवाओं में उड़ने की ये सज़ा यारों ,
कि मै ज़मीन के रिश्तों से कट गया यारों ।
- वसीम बरेलवी
पानी पे तैरती हुई इक लाश देखिये ,
और सोचिये कि डूबना कितना मुहाल है ।
- वसीम बरेलवी
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