Sunday, 16 September 2012

                            अंदाज़े बयाँ 

कोई हाथ भी न मिलाएगा 
जो गले मिलोगे तपाक से ,
ये नए मिज़ाज का शहर है 
ज़रा फासले से मिला करो ।
                   - बशीर बद्र 

मिली हवाओं में उड़ने की ये सज़ा यारों ,
कि मै ज़मीन के रिश्तों से कट गया यारों ।
                                                  - वसीम बरेलवी 
पानी पे तैरती हुई इक लाश देखिये ,
और सोचिये कि डूबना कितना मुहाल है ।
                                                - वसीम बरेलवी 




Saturday, 15 September 2012

                                                क्या आप जानते हैं ?   
                         
(Weekly Column)
1 दुनिया का सब से बड़ा फूल (rafflesia) रफ्लेशिया है 
   जो इंडोनेशिया में पाया जाता है ।

2 वीनस फ्लाई ट्रैप नाम का पौधा अपनी एक्स्ट्रा 
  ख़ुराक पाने के लिए कीड़े -मकोड़ों को ट्रैप कर के 
 खा जाता है ।


 




 

Friday, 14 September 2012

                          तस्वीर बोलती है  (Weekly Column) 

            जब मैं हंसा तो साथ मेरे इक जहान था 
             
अब आज रो रहा हूँ ,कोई पूछता नहीं
                                                   -राही नक़वी 

  

   
                             ख़ूबसूरत बातें (Weekly Column)
    कभी -कभी जो सवाल हम को बहुत मुश्किल लगते 
    हैं अस्ल में उनके जवाब बहुत आसान होते हैं ।
                                                              डॉक्टर सेउस 
ज़रा मुस्कुराइए  (Weekly  Column)
एक बच्चा दौड़ा-
दौड़ा अपनी माँ के पास आया और बोला "मम्मी ज़रा यह तो बताइए कि अगर कोई आदमी अपने पड़ोसी के घर में झांक रहा हो और छुप -छुप कर उन की बातें सुन रहा हो और वह पड़ोसी उस को ऐसा करते हुए पकड़ ले तो उस आदमी के साथ क्या सुलूक करेगा ?" माँ ने जवाब दिया "पड़ोसी उस की जम कर पिटाई करेगा और क्या ?" । इतना सुनते ही बच्चा जाकर अल्मारी में कुछ  ढूँढने लगा । बेटा क्या ढूँढ रहे हो ? माँ ने पूछा । "मम्मी First aid box ढूंढ रहा हूँ क्योंकि इतनी पिटाई होने के बाद पापा को दवा भी तो लगानी पड़ेगी ।"



   

Wednesday, 12 September 2012

Is the moon tired ?
                                                         --  Christina Rossetti  
Is the moon tired ? She looks so pale

Within her misty veil ;
She scales the sky from east to west 
And takes no rest.

Before the coming of the night 
The moon shows papery white; 
Before the dawning of the day,
She Fades away.

                           
       

 थका हुआ चाँद  
(Translated by राही नक़वी)     
ये चाँद थक चुका है क्या ?
लगे है आज मुझको वो बुझा-बुझा सा 
ज़र्द-ज़र्द 
छुपा है बादलों में वो
फिरे है बेक़रार सा वो फैले आसमान में
कभी इधर कभी उधर
ये रात जब न आई थी तो कुछ चमक थी चाँद में
सुबह जो होने आई तो, ये चाँद भी धुन्धला गया ।

                            
           
                                 


Tuesday, 11 September 2012

         बनारसी साड़ी 
उत्तर प्रदेश के बनारस ज़िले में तैयार की जाने वाली बनारसी   साड़ियाँ हर हिन्दुस्तानी औरत की पसंद हैं। ऐश्वर्या राय हो या ज़रीन ख़ान या फिर टीवी की कोकिला बेन सबने यह साड़ियाँ पहनी हैं ।हमारे मुल्क में दुल्हन को दिए जाने वाले सामान की list तब तक मुकम्मल नहीं होती जब तक उसमें बनारसी साड़ी न शामिल हो।बनारस में रहने वाले बुनकर बड़ी ही मेहनत और महारत के साथ इन साड़ियों को तैयार करते हैं ।
ज़री के ख़ूबसूरत और भारी काम से सजी यह साड़ियाँ  निहायत हसीन होती हैं । आसान डिज़ाइन और कम काम वाली साड़ी  पन्द्रह से बीस दिन में तैयार हो जाती है  जबकि भारी काम और मुश्किल डिज़ाइन की साड़ी को बनाने में कम से कम छह-सात महीने लग जाते हैं ।साड़ी का डिज़ाइन ज़्यादातर मुग़ल स्टाइल का होता है ।
बहुत ही उम्दा क़िस्म के सिल्क पर सोने और चांदी के तारों(threads) से ज़री का काम बनाया जाता है । साड़ी 
के आँचल की ख़ूबसूरती देखने वाली होती है ।पूरी साड़ी ख़ूबसूरत फूलों और बेल बूटों से सजी होती है । इनमें मीनाकारी, जाली के काम वाली और भारी काम वाली साड़ी की मांग बहुत ज़्यादा है। बनारस की पहचान बन चुकी यह साड़ियाँ न सिर्फ हिन्दुस्तान बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर हैं।