Friday, 21 September 2012
Thursday, 20 September 2012
Poem Queen Mab
By Thomas Hood
नन्ही सी है एक परी जो रोज़ रात को आती ,
आँखें उसकी नीली- नीली,बाल हैं उसके भूरे ,
परों पे उसके चाँदी जैसे छोटे - छोटे धब्बे,
रोज़ उतरकर चाँद से नीचे पंख हिलाती आती ।
एक रुपहली छड़ी हमेशा हाथ में अपने लेकर
जब इक प्यारा बच्चा अपने बिस्तर पर सो जाता
दाएँ-बाएँ हाथ हिलाती वह परियों की रानी ,
तब वह बच्चा मीठे-मीठे सपनों में खो जाता,
उन सपनो में झरने होते, झरनों में जलपरियाँ होतीं,
भीनी -भीनी खुशबू वाले बाग़ महकते,
और हमेशा रहने वाले फूल भी होते,
धूप में चम-चम करने वाली मक्खी होती,
छाँव में चम-चम करने वाले जुगनू होते,
प्यारी-प्यारी बातें करती चिड़ियाँ आएं कभी कहानी
और कभी फिर मीठा-मीठा गीत सुनाएं
और कभी फिर मीठा-मीठा गीत सुनाएं
परियों की वह प्यारी वादी और परियों के सुन्दर परबत
Translated By: Raahi Naqvi
Tuesday, 18 September 2012
ख़ुदा का इन्साफ़
वह एक ज़ालिम और सनकी बादशाह था ।उसे ग़रीब अवाम को परेशान करने में मज़ा आता था ।एक बार उसने एक बढ़ई को हुक्म दिया," जाओ और तेरह हज़ार तेरह सौ पौंड वज़न का लकड़ी का महीन बुरादा (powder) तैयार करके कल सुबह तक ले कर आओ ।"पुराने ज़माने में आज -कल की तरह मशीनें नहीं होती थीं इस लिए एक रात में इतना बुरादा तैयार करना नामुमकिन था ।बढ़ई परेशान हाल घर पहुंचा और अपनी बीवी को यह बात बताई ।बीवी ने कहा "परेशान मत हो ख़ुदा पर भरोसा रखो।"वह दोनों रो-रो कर ख़ुदा से रहम की दुआएं मांगने लगे।सुबह होने ही वाली थी कि दरवाज़े पर दस्तक हुई।बढ़ई ने जाकर देखा तो दरवाज़े पर बादशाह के सिपाही खड़े थे।एक सिपाही धीमी आवाज़ में बोला "सुनो बढ़ई बेहतरीन लकड़ी का एक उम्दा ताबूत तैयार करो बादशाह मर गया है।" Translated By-Raahi Naqvi

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वह एक ज़ालिम और सनकी बादशाह था ।उसे ग़रीब अवाम को परेशान करने में मज़ा आता था ।एक बार उसने एक बढ़ई को हुक्म दिया," जाओ और तेरह हज़ार तेरह सौ पौंड वज़न का लकड़ी का महीन बुरादा (powder) तैयार करके कल सुबह तक ले कर आओ ।"पुराने ज़माने में आज -कल की तरह मशीनें नहीं होती थीं इस लिए एक रात में इतना बुरादा तैयार करना नामुमकिन था ।बढ़ई परेशान हाल घर पहुंचा और अपनी बीवी को यह बात बताई ।बीवी ने कहा "परेशान मत हो ख़ुदा पर भरोसा रखो।"वह दोनों रो-रो कर ख़ुदा से रहम की दुआएं मांगने लगे।सुबह होने ही वाली थी कि दरवाज़े पर दस्तक हुई।बढ़ई ने जाकर देखा तो दरवाज़े पर बादशाह के सिपाही खड़े थे।एक सिपाही धीमी आवाज़ में बोला "सुनो बढ़ई बेहतरीन लकड़ी का एक उम्दा ताबूत तैयार करो बादशाह मर गया है।" Translated By-Raahi Naqvi 
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