बेटियाँ
हाँ ! ये बेटी खुदा की रहमत है ।
एक बेटी पराई होकर भी ,
करती माँ-बाप से मोहब्बत है ।
मेरे माँ-बाप ख़ुश रहें मुझसे,
उसकी मासूम सी ये हसरत है ।
कोई मुश्किल घड़ी हो या हो उदास ,
बेटी हर वक़्त माँ की हिम्मत है ।
वो जो बेटी को कम समझते हैं ,
ऐसे लोगों पे मुझको हैरत है ।
इनकी माँ ख़ुद भी एक बेटी है ,
भूल जाने की इनको आदत है ।
मेरी बेटी तू मुझको प्यारी है ,
तू ही राही के दिल की राहत है ।
- राही नक़वी

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