शख्सियत
बेगम हज़रत महल लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह की पहली बेगम थीं । यह 1820 ईसवी में उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद जिले में पैदा हुईं । हिंदुस्तान की पहली जंग ऐ आज़ादी में इनका रोल काफी अहम था । अवध को अंग्रेजों के चंगुल से आज़ाद कराने के लिए इन्होने अपनी खुद की एक फ़ौज तैयार की और अंग्रेजों के ख़िलाफ़ बहादुरी के साथ लड़ीं । 1857 के ग़दर के दौरान इन्होने लखनऊ पर दोबारा क़ब्ज़ा हासिल किया और अपने बेटे नवाब बिर्जीस क़दर को गद्दी पर बिठाया लेकिन बाद में अंग्रेजों ने दोबारा अवध पर क़ब्ज़ा कर लिया और बेगम को लखनऊ छोड़कर नेपाल जाने पर मजबूर होना पड़ा जहाँ काठमांडू में 1879 ईसवी में इस बहादुर ख़ातून का इन्तेकाल हो गया । इनकी क़ब्र काठमांडू की जामा मस्जिद में बनाई गयी । लखनऊ में इनके नाम पर बहुत बड़ा पार्क है जिसको लोग 'बेगम हज़रत महल पार्क' के नाम से जानते हैं ।
'बेगम हज़रत महल'
बेगम हज़रत महल लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह की पहली बेगम थीं । यह 1820 ईसवी में उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद जिले में पैदा हुईं । हिंदुस्तान की पहली जंग ऐ आज़ादी में इनका रोल काफी अहम था । अवध को अंग्रेजों के चंगुल से आज़ाद कराने के लिए इन्होने अपनी खुद की एक फ़ौज तैयार की और अंग्रेजों के ख़िलाफ़ बहादुरी के साथ लड़ीं । 1857 के ग़दर के दौरान इन्होने लखनऊ पर दोबारा क़ब्ज़ा हासिल किया और अपने बेटे नवाब बिर्जीस क़दर को गद्दी पर बिठाया लेकिन बाद में अंग्रेजों ने दोबारा अवध पर क़ब्ज़ा कर लिया और बेगम को लखनऊ छोड़कर नेपाल जाने पर मजबूर होना पड़ा जहाँ काठमांडू में 1879 ईसवी में इस बहादुर ख़ातून का इन्तेकाल हो गया । इनकी क़ब्र काठमांडू की जामा मस्जिद में बनाई गयी । लखनऊ में इनके नाम पर बहुत बड़ा पार्क है जिसको लोग 'बेगम हज़रत महल पार्क' के नाम से जानते हैं ।
No comments:
Post a Comment