''अपनी बात"
मै हँसने का बहाना चाहती हूँ ,
मै खुलकर मुस्कुराना चाहती हूँ ।
अँधेरा हार जाए , लौट जाए,
शमा ऐसी जलाना चाहती हूँ ।
ये छोटी-छोटी ख़ुशियाँ मोतबर हैं ,
मै इनमे मुस्कुराना चाहती हूँ ।
मै अपनी मुख़्तसर दुनिया से बाहर ,
न निकली हूँ , न आना चाहती हूँ ।
मेरा अल्लाह जिससे ख़ुश हो ' राही ',
मै वो नेकी कमाना चाहती हूँ ।
- राही नक़वी
मै खुलकर मुस्कुराना चाहती हूँ ।
अँधेरा हार जाए , लौट जाए,
शमा ऐसी जलाना चाहती हूँ ।
ये छोटी-छोटी ख़ुशियाँ मोतबर हैं ,
मै इनमे मुस्कुराना चाहती हूँ ।
मै अपनी मुख़्तसर दुनिया से बाहर ,
न निकली हूँ , न आना चाहती हूँ ।
मेरा अल्लाह जिससे ख़ुश हो ' राही ',
मै वो नेकी कमाना चाहती हूँ ।
- राही नक़वी

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