Sunday, 26 August 2012

मेरे  नाना  बचपन   में  मुझे  बहुत  सारी  मज़ेदार  कहानियां  सुनाया करते  थे | जिनमें  अकबर  और  बीरबल  के  क़िस्से  मुझको  बहुत  पसंद  थे | ये क़िस्से  उनको ज़बानी याद थे । अकबर और बीरबल की यह कहानियां मै वक़्त-वक़्त पर अपने अल्फाज़  में ढालकर  एहसास में लिखती रहूंगी। ऐसी ही एक मज़ेदार कहानी आज लिख रही हूँ । 
                             
                                 आम की दावत

एक बार की बात है  बादशाह अकबर अपनी बेगम,अपने वज़ीर  बीरबल और कुछ दूसरे ख़ास  लोगों के साथ अपने शाही बाग़ की सैर करने के लिए गए ।

 गर्मी का मौसम था और आम के पेड़ों पर ढेर सारे पके हुए आम  लगे थे। यह देखकर बादशाह का दिल आम खाने का हुआ । उनहोंने हुक्म
दिया कि  सबके लिए आम की दावत का इंतेज़ाम किया जाए । लिहाज़ा 
 सब लोग एक पेड़ के नीचे बैठ गए और सबके सामने अलग-अलग तश्त
(थाल) में आम रख दिए गए । सब लोग आम खाने लगे, बादशाह की बेगम जो उनके क़रीब ही बैठी थी आम खाकर उसकी गुठलियाँ अपने पास 
न रखकर बादशाह की तरफ रखती जा रही थीं । जब दावत ख़त्म हो गयी 

तो बेगम बादशाह से बोली," बादशाह सलामत आप तो बड़े खाऊगीर(पेटू) हैं , आपके सामने तो गुठलियों का ढेर लगा है ,आपने कितने सारे आम खा लिए!" बेगम को मालूम नहीं था कि बीरबल जो उनकी  इस हरकत को देख रहे थे पहले ही बादशाह के कान में 
चुपके से उनकी  की इस शरारत का हाल बता चुके हैं । बादशाह अकबर जो बड़े हाज़िरजवाब थे ,
बेगम की बात सुनकर मुस्कुराते हुए बोले, " बेगम, हमने तो सिर्फ आम खाए हैं लेकिन आप तो हमसे भी बड़ी खाऊगीर निकलीं आम के साथ-साथ गुठलियाँ भी खा गयीं ।" बादशाह की बात सुनकर बेगम को खामोश रहने के अलावा कोई जवाब न सूझा ।- राही नक़वी 




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